Indian Geography Questions Answers in Hindi

भारत का भूगोल का सामान्य ज्ञान (Indian Geography ) भारत एक विशाल देश है। इसकी विशालता के कारण इसे उपमहाद्वीप की संज्ञा भी दी गई है। यह विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जिसका नाम हिन्द महासागर से जुड़ा है भारत की आकृति चतुष्कोणीय है। अक्षांश की दृष्टि से भारत उत्तरी गोलार्द्ध का देश है तथा देशान्तर की दृष्टि से पूर्वी गोलार्द्ध के मध्य मे है। Indian Geography Questions भारत का क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किमी ० है क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व का सातवाँ देश है। इसका क्षेत्रफल विश्व के क्षेत्रफल का 2.24% है। भारत से पहले बड़े क्षेत्रफल वाले देश रूस, कनाडा, चीन, अमेरिका, ब्राजील एवं आस्ट्रेलिया है

Indian geography questions in Hindi

1. भारत मे पूर्वी एवं पश्चिमी तटों पर पीई जाने वाली मिट्टी है ?

 
 
 
 

2. सूरजमुखी उत्पादन मे दूसरा स्थान किस राज्य का है ?

 
 
 
 

3. शेख आलम हवाई अड्डा कहाँ स्थित है  ?

 
 
 
 

4. दिल्ली मेट्रो रेल किस देश की सहयोग से चलाई गई ?

 
 
 
 

5. स्वर्णिम चतुर्भुज योजना मे कौनसा राजमार्ग है ?

 
 
 
 

6. मूंगफली किस प्रकार की फसल है ?

 
 
 
 

7. भारत मे सड़कों की सबसे अधिक लंबाई कहाँ है ?

 
 
 
 

8. वकौनसी श्रेणी पूर्वी घाट एवं पश्चिमी घाट को जोड़ती हैं ?

 
 
 
 

इन्हे भी देखे – World History in Hindi

About Indian Geography Questions in Hindi

भारत की स्थल सीमा की लंबाई 15,200 किमी० है। इसके मुख्य भूमि की तटीय सीमा की लंबाई 6100 किमी ० है। सेश की कुल तटीय सीमा की लंबाई 7516.6 किमी ० है। इस प्रकार भारत की कुल सीमा 15200+7516.6 = 22716.6 किमी ० लंबी है। इसका विस्तार उत्तर-दक्षिण दिशा मे 3214 किमी० तथा पूर्व-पश्चिम मे 2933 किमी ० है। देश की मानक समय सीमा जो इलाहाबाद नैनी उत्तर प्रदेश से गुजरती है यह ग्रीनविच समय से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।

Indian geography questions in Hindi
Indian Geography Questions in Hindi भारत का भूगोल का सामान्य ज्ञान

Physical Region of India भारत के भौतिक प्रदेश

Indian Geography in Hindi संरचना की विविधता ने देश के उच्चावच तथा भौतिक लक्षणों की विविधता को जन्म दिया है। देश के लगभग 10.6% क्षेत्र पर पर्वत, 18.5% क्षेत्र पर पहाड़ियाँ, 27.7% पर पठार तथा 43.2% क्षेत्रफल पर मैदान है भारत की भौगोलिक आकृतियों को चार भागों मे विभाजित किया जा सकता है।

  1. उत्तर का पर्वतीय क्षेत्र The Northern Mountain Region :- उच्च धरातल , पूर्वगामी जलप्रवाह, शीतोष्ण सघन वनस्पति आदि विशेषताएं भारत के इस पर्वतीय भाग को अन्य धरातलीय भू-भाग से अलग करती है। हिमालय का विस्तार उत्तर-पश्चिम सिंधु नदी के मोड से प्रारम्भ होकर दक्षिण-पूर्व ब्रह्मपुत्र नदी के मोड तक फेला है। हिमालय पर्वत की उत्पत्ति टेथीस भुसन्नति के मलवों के लगातार जमाव-धंसाव तथा वलन क्रिया से हुई है। प्लेट विवर्त्तनिकी के सिद्धांत के अनुसार इण्डियन एवं यूरेशीयन प्लेटों के टकराव से हिमालय का निर्माण हुआ है। इस पर्वत श्रंखला को चार समानांतर पर्वत श्रेणियों मे विभक्त किया गया है
    • ट्रांस हिमालय :- यह हिमालय के उत्तर मे तिब्बत मे स्थित है ट्रांस हिमालय मे दक्षिण से उत्तर मे क्रमशः कैलाश , जास्कर, लद्दाख एवं काराकोरम श्रेणियाँ पी जाती है। भारत की सबसे उँची चोंटी K2 या गाडविन आस्टिन (8611 मी. ) काराकोरम श्रेणी मे स्थित है राकापोशी विश्व की सबसे लंबी ढाल वाली चोटी है यही स्थित है
    • वृहद् हिमालय Greater Himalaya :- महान हिमालय कश्मीर मे नंगा पर्वत से लेकर अरुणाचल प्रदेश मे नामचा बारवा तक विस्तृत है। हिमालय की सर्वोच्च चोटियाँ महान हिमालय मे जाती है माउंट एवरेस्ट जिसे तिब्बत मे चोमोलुंगमा (पर्वतों की रानी) तथा नेपाल मे सागरमाथा कहा जाता है। महान हिमालय के प्रमुख दर्रे, कश्मीर मे बुर्जिल, जोजिला, हिमाचल प्रदेश मे बारा लाचाला, शिपकीला, उत्तरांचल मे थागला, नीति, लिपुलेख, सिक्किम मे नाथुला, जीलपला थाहा अरुणाचल प्रदेश मे बोमड़ीला, बुमला दर्रा स्थित है
    • मध्य या लघु हिमालय :- मध्य हिमालय महान हिमालय के दक्षिण मे स्थित है मध्य हिमालय मे पीर पंजाल एवं बनिहाल दो प्रमुख दर्रे है बनिहाल दर्रे से होकर जम्मू-श्रीनगर मार्ग गुजरता है जवाहर सुरंग भी इसी दर्रे मे है।
    • शिवालिक या उप हिमालय :- यह हिमालय की सबसे नवीन एवं कम उचाई वाला भाग है। यह श्रेणी पंजाब के पावर बेसिन से कोसी नदी तक विस्तृत है जो बालू कंकड़ और चिकनी मिट्टी से निर्मित है
  2. प्रायद्वीपीय पठार :- यह प्राचीन गोंडवाना भूमि का भाग है इसकी आकृति त्रिभुजाकार है यह राजस्थान से कुमारी अंतरीप तथा गुजरात से पश्चिम बंगाल तक विस्तृत है नर्मदा नदी का भ्रंशन इस पठार को दो भागों मे बांटता है
    • मध्यवर्ती उच्च भूमि -जिसमे अरावली पर्वत , मालवा का पठार , बुंदेलखंड उच्च भूमि , छोटा नागपूर का पठार , मेघालय का पठार शामिल है
    • दक्कन का पठार- यह त्रिभुजाकार पठार पूर्वी तथा पश्चिमी घाटों , सतपुड़ा श्रेणी , मेकल तथा राजमहल पहाड़ियों के बीच 7 लाख वर्ग किमी मे फेला है
  3. उत्तर भारत का मैदान :-यह मैदान उत्तर मे हिमालय तथा दक्षिण मे पर्यायद्वीप पठार के बीच एक काँपीय प्रदेश है जो सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र एवं उनकी सहायक नदियों द्वारा लाए गए अवसादों से निर्मित है। काँप के निक्षेपों के आधार पर इसे पाँच भागों मे बाँटा गया है
    • भाबर – जहां हिमालय पर्वत एवं सतलज – गंगा के मैदान मिलते है वहाँ हिमालय से निकलने वाली असंख्य धाराओं ने छोटे-छोटे कंकड़-पत्थरों को जमा कर मैदानी भाग की रचना की है जिसे भाबर कहा जाता है।
    • तराई – यह भाबर के दक्षिण मे चौड़ी दलदली पट्टी है
    • बांगर – यह पेटी उच्च भूमि के निक्षेपों से निर्मित काँपीय वेदिकाएं है इसमे कैल्शियम कार्बोनेट तथा कंकड़ की अधिकता पी जाती है
    • खादर – बाढ़ के मैदानों की नवीन काँप की पेटी है
    • डेल्टा – डेल्टा मैदान मुखतः कीचड़ तथा दलदल युक्त होती है
  4. तटवर्ती मैदान एवं द्वीप समूह :- दक्षिण पठार से पूर्वी एवं पश्चिमी घाट और समुद्र के बीच तटीय मैदान विस्तृत हैं। प्रायद्वीपीय पठारी भाग मे संकीर्ण मैदानी भाग है जो पश्चिमी तटीय मैदान व पूर्वी तटीय मैदान के नाम से जाना जाता है।
  5. भारत मे 247 द्वीप समूह है जो बांहल की खाड़ी (204 द्वीप) तथा अरब सागर (43 द्वीप) मे बिखरें है।

Drainage System of India अपवाह तंत्र Indian Geography in Hindi

भारत नदियों का देश है यहाँ 4000 से भी अधिक छोटी-बड़ी नदियां मिलती है। inके अपवाह को दो वर्गों मे बाँटा गया है (1)हिमालय का अपवाह , (2) प्रायद्वीपीय अपवाह

हिमालय अपवाह के नदी तंत्र(Himalayan River System)

सिंधु तंत्र(Indus river system) :- सिंधु तंत्र विश्व के विष्यलतं नदी तंत्रों मे से एक है इसके अंतर्गत सिंधु एवं इसकी सहायक नदियां झेलम, चिनाव, रावी, व्यास, सतलज, गिलगिट, जास्कर, गोमल, शिगार, कुरर्म, काबुल सम्मिलित है। सिंधु तिब्बत मे मानसरोवर झील के निकट चेमायंगडुँग ग्लेशियर से निकलती है झेलम नदी पीरपंजाल पर्वत मे स्थित शेषनाग झील से निकलकर वुलर झील मे मिलती है। चिनाब सिंधु की विशालतम नदी है जो हिमाचल प्रदेश में चंद्र भागा कहलाती है। यह लाहौल जिले के बारा लाचाला दर्रे के निकट से निकलती है।

गंगा तंत्र (Ganga river system) :- गंगा उत्तराखंड के उत्तर काशी जिले से गोमुख के निकट गंगोत्री हिमानी से निकलती है। जहां इसे भागीरथी कहते है बांग्लादेश मे गंगा को पदमा कहते है जहाँ ये बंगाल की खाड़ी मे मील जाती है। इसकी सहायक नदिया यमुना, चम्बल, सोन, रामगंगा, घाघरा, गंडक तथा कोसी है

ब्रह्मपुत्र तंत्र(Brahmaputra river system) :- ब्रह्मपुत्र नदी सांगपो ( चेमायुंगडुंग हिमनद से निकलती है यह गंगा मे मिलने वाली नाड़ियों मे सबसे बड़ी है। इसका अपवाह तंत्र तीन देश तिब्बत,भारत और बांग्लादेश मे विस्तृत है। इसकी सहायक नदियां सुबनासिरी, धानश्री, तिस्ता एवं मानस हैं। दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप माजुली द्वीप इसी नदी पर है

प्रयद्वीपीय अपवाह के नदी तंत्र (Peninsular Rivers Drainage system)

प्रायद्वीप नदियाँ हिमालय की नदियों से अधिक पुरानी है। ये अपना आधार तल को प्राप्त कर चुकी है इसलिए इनका ढाल अत्यंत मंद है। ये नदिया दो भागों मे बाँटी गई है –

  1. बंगाल की खाड़ी मे गिरने वाली नदियाँ Indian geography Questions
    • महानदी छत्तीसगढ़ के सिंहावा श्रेणी से निकाल कर ओडिशा मे डेल्टा बनाते हुए बंगाल की खाड़ी मे गिरती है। हीराकुंड, टिकरपारा व नराज इस नदी की प्रमुख बहूद्देशीय योजनाएं है
    • गोदावरी – प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी पश्चिमी घाट की नासिक की पहाड़ियों मे त्र्यंबक से निकलती है। इसे वृद्ध गंगा या दक्षिण गंगा भी कहते है
    • कृष्णा नदी – प्रयद्वीपीय भारत की दूसरी बड़ी नदी जो महालेश्वर के निकट से निकलकर दक्षिण-पूर्व मे 1400 किमी की लंबाई मे बहती है। इसकी सहीक नदियाँ कोयना , येरला, वर्णा, पेंचगंगा, दूधगंगा, घाटप्रभा, तुंगभद्रा एवं मुसी है तुंगभद्रा की सहायक नहीं हगरी है।
    • कावेरी नदी – यह कर्नाटक के कुर्ग जिले मे ब्रह्मगिरी से निकलती हैं। यह शिवसमुद्रम जल प्रपात बनती है। कावेरी को दक्षिण की गंगा की उपमा दी गई है।
  2. बंगाल की खाड़ी मे गिरने वाली नदियां Indian geography
    • नर्मदा – इसका उदगम् मैकाल पर्वत की अमरकंटक चोटी है। अरब सागर मे हिर्ने वाली सबसे बड़ी नदी है यह विंध्याचल एवं सतपुड़ा के बीच एक भ्रंश घाटी से होकर गुजरती है। जबलपुर के पास यह धुआंधार जल प्रपात बनती है
    • ताप्ती(तापी)– यस मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुल्ताई नामक स्थान के पास सतपुड़ा श्रेणी से निकलती है पूर्णा इसकी सहायक नदी है
    • लूनी – यह अजमेर मे अरावली के नह पर्वत से निकलकर कच्छ के रन मे दलदल मे विलुप्त हो जाती है इसे भारत की लवण नदी भी कहते है।
    • अन्य नदियाँ जैसे साबरमती ,माही ,घग्घर आदि अरब सागर मे गिरने वाली नदियाँ हैं।

Lakes in India भारत की प्रमुख झीलें Indian geography Questions भारत का भूगोल

विवर्तनिक झीलें – कश्मीर की वुलर झील ( तुलबुल परियोजना इसी झील पर है )

ज्वालामुखी क्रिया से निर्मित झील – महाराष्ट्र के बुलढाना जिले की लोनार झील

लैगून या अनूप झीलें – चिल्का (उड़ीसा),पुलिकट झील (तमिलनाडु), कोलेरू झील (आंध्रप्रदेश), अष्टमुदी झील (केरल)

हिमानी द्वारा निर्मित झीलें – राकसताल, नैनीताल, भीमताल, पुनताल, मलवाताल (उत्तराखंड)

वायु द्वारा निर्मित झीलें – राजस्थान की सांभर,डिडवाना,पंचभद्र,लूनकरनसर आदि

अन्य झीलें – लोकटक (मणिपुर), वेम्बानाड (केरल), (डलझील,मानसबल,शेषनाग,अनन्तनाग) जम्मू-कश्मीर , (उदय सागर,पिछोला,फतेहसागर,जयसमंद,राजसमंद) राजस्थान , हुसैनसागर झील तेलंगाना

Climate of India भारत की जलवायु Indian Geography Questions

भारत की जलवायु उष्णकंटिबंधीय मानसूनी है। किसी क्षेत्र मे लंबे समय तक जो मौसम की स्थति होती है उसे उस स्थान की जलवायु कहते है तथा उस स्थान की थोड़े समय की वायुमंडलीय अवस्था को वहाँ का मौसम कहते है।किसी भी क्षेत्र की जलवायु को नियंत्रित करने वाले छः कारक अक्षांश , उचाईं , वायुदाब , पवने , समुद्र से दूरी महसागरिय धराएं एवं उचावच लक्षण है मानसून की प्रक्रिया को समझने के लिए निम्न तथ्य समझना जरूरी है Indian geography मे इसका अध्ययन आती आवश्यक है

Factors Affecting Climate of India Indian Geography in Hindi
  1. तापीय संकल्पना – जल और स्थल के गरम एवं ठंडे होने की विभ्रेदी क्रियाओ के कारण भारत के स्थल भाग पर न्यून दाब का क्षेत्र उत्पन्न होता है , जबकि इसके आस-पास समुद्रों के ऊपर उच्च दाब का क्षेत्र बनता है
  2. गतिक संकल्पना – ग्रीष्म ॠतु मे उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र की स्थिति गंगा के मैदान की ओर खिसक जाती है यह मानसून ॠतु मे मानसून गर्त के नाम से जाना जाता है
  3. जेट धार सिद्धांत – ये एक संकरी पट्टी मे स्थित क्षोभमंडल मे 12000 मी से अधिक उचाईं वाली पश्चिमी हवाएं होती है इनकी गति ग्रीष्म ॠतु मे 110 किमी/घण्टा तथा सर्दियों मे 184 किमी /घण्टा होती है
  4. महसागरीय राशियाँ – जब दक्षिण प्रशांत महासागर मे उष्ण कटिबंधीय पूर्वी बाग मे उच्च दाब होता है तब हिन्द महासागर के उष्ण कटिबंधीय पूर्वी भाग मे निम्न दाब होता है
Types of Monsoon in India

उत्तर-पूर्वी मानसून(North east monsoon in India) भूमध्य क्षेत्रों मे मध्य दिसंबर से मध्य मार्च तक हल्की वर्षा होती है तथा हिमालय एवं कश्मीर मे भारी हिमपात होता है उत्तर – पूर्वी मानसून के कारण तमिलनाडु के कोरोमंडल तट पर भारी वर्ष होती है

दक्षिण-पश्चिमी मानसून(South west monsoon in India)– जून माह से सितंबर तक। उत्तरी-पश्चिमी मैदानों मे तापमान के तेजी बढ़ने के कारण वायुदाब को दशाएं हिन्द महासागर से आने वाली दक्षिणी गोलार्द्ध की व्यपरिक पवनों को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। ये व्यापारिक पवने भूमध्य रेखा को पार् करके बंगाल की खाड़ी और आरव सागर मे प्रवेश कर जाती है यहाँ से ये पवने भारत के वायु परिसंचरण मे मिल जाती है

Seasons in India भारत की ऋतुएँ Indian Geography Questions

भारत मे ऋतु चक्र का आधार भारत के लोगों का अपना अनुभव एवं प्राचीन काल से चला आया मौसम के घटकों का ज्ञान है। भारतीय ऋतुओं को छः ऋतु मे बाँटा गया है

  1. बसंत ऋतु – मार्च और अप्रैल
  2. ग्रीष्म ऋतु – मई – जून
  3. वर्षा ऋतु – जुलाई – अगस्त
  4. शरद ऋतु – सितंबर-अक्टूबर
  5. हेमंत ऋतु – नबम्बर – दिसंबर
  6. शिशिर ऋतु – जनवरी – फरबरी
Natural Vegetation of India भारतीय प्राकृतिक वनस्पति

प्राकृतिक वनस्पति का अर्थ उस वनस्पति से है जो मानव की सह्यता के विना अपने आप उत्पन्न हुई और लंबे समय तक उस पर कोई मानवीय प्रभाव नहीं पड़ता है इसे अक्षत वनस्पति कहते है

Types of Vegetation in India– भारत मे विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक वनस्पति पी जाती है मिट्टी और जलवायु की विविधता के कारण भारत मे वनस्पति मे क्षेत्रीय विभिन्नताएं पी जाती है।

  1. उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन एवं अर्ध-सदाबहार वन – भारत मे 200 सेमी या इससे अधिक वर्षा वाले भागों मे उष्ण कटिबंधीय वन पाए जाते है। इस प्रकार के वन अण्डमान व निकोबार द्वीप समूह , केरल की पश्चिमी घाट की पहाड़ियों पर, महाराष्ट्र , कर्नाटक, पश्चिम बंगाल तथा असम के पर्वतीय ढालों पर पाए जाते हैं। विभिन्न परकर की लताओं व झाड़ियों से घिरे होने के कारण ये वन अत्यंत सघन एवं दुर्गम होते है। इनमे वृक्षों की लंबाई 40 से 60 मित्र तक होती है मुख्य वृक्ष जैसे आम, रवर, महोगिनी, बाँस, तून, तुलसर आदि होते है
  2. उष्ण कटिबंधीय पर्णपती या आर्द्र मानसूनी वन – 100 से 200 सेमी वर्ष वाले भागों मे इस प्रकार के वन मिलते है। इस प्रकार के वन पंजाब से असम तक हिमालय की बाहरी व निचली ढलानों पर अधिक मिलते है। ग्रीष्म काल मे ये अपनी पत्तियां गिरा देते है। ये वन उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, मे बि मिलते है। इसके वृक्षों की लंबाई 20 से 40 मीटर तक होती है। इसमे मुख्य वृक्ष साल, सागौन, पलाश, वांस, आँवला, शीशम, एवं सफेद चंदन आदि है
  3. उष्ण कटिबंधीय काँटेदार वन – जिन प्रदेशों मे वर्षा 50 से कम होती है वहाँ शुष्क कटीले वन पाए जाते है। इस प्रकार के वन दक्षिणी-पश्चिमी पंजाब , दक्षिणी-पश्चिमी उत्तरप्रदेश , हरियाणा, आंध्रप्रदेश तथा गुजरात मे इस प्रकार के वन पाए जाते है। इनमे झाड़ियों की अधिकता होती है एवं काम हरे-भरे होते है। इन वनों के वृक्ष मोटे पत्तेदार व काँटेदार होते है यहाँ के मुख्य वृक्ष बबूल, रामबांस, कीकर, नीम आदि प्रमुख हैं।
  4. डेल्टाई व ज्वरीय वन– इस प्रकार के वनों को मैनग्रोव या सुंदरवन भी कहा जाता है इनकी उपस्थिति मुख्य रूप से नदियों के डेल्टा भागों मे एवं समुद्र तटीय भागों मे पाई जाती है। ये वन दलदली एवं कीचड़ युक्त होते है भारत मे ये वन गंगा, महानदी, गोदावरी आदि नदियों के डेल्टा भागों मे पाए जाते हैं।
  5. पर्वतीय वन – हिमालय के पर्वतीय प्रदेशों मे पी जाने वाली वनस्पति मे पर्याप्त भिन्नता होती है क्योंकि हिमालय के पूर्वी भाग मे पश्चिम भाग की अपेक्षा अधिक वर्ष होती है यहाँ वनस्पति की सघनता अधिक मिलती है पर्वतीय वनों को दो भागों मे बाँटा गया है
    • पूर्वी हिमालय के वन – यहाँ तराई से 1520 मीटर ऊंचाई तक सदाबहार वन मिलते है इसके मुख्य वृक्ष साल, चिनौली, अमुरा, महुआ आदि पाए जाते है
    • पश्चिमी हिमालय के वन – इन वनों का विस्तार 1500 से 3600 मीटर की ऊंचाई तक है। वर्ष की कमी एवं शीत की अधिकता के कारण चीड़, देवदार,ब्लू, वर्च, आदि वरक्ष मिलते हैं।
Soil of India भारतीय मृदा भारत का भूगोल सामान्य जानकारी (Indian Geography Questions )

मृदा वह प्राकृतिक पिण्ड है जो विच्छेदित एवं अपक्षीय खनिजों एवं कार्बनिक पदार्थों के विगलन से निर्मित पदार्थों के परिवर्तनशील मिश्रण से परिच्छेदिका के रूप मे संश्लेषित होती हैं। जल तथा वायु की उपयुक्त मात्रा से पौधों को आंशिक आजीविका प्रदान करती है। मृदा के अध्ययन को मृदा विज्ञान (Pedology) कहते है  

Types of soils in India Indian Geography

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने भारत की मृदाओ पर बहुत अध्ययन किया तथा 1986 ई मे देश मे 8 प्रकार की प्रमुख मिट्टियों की पहचान की है।

  1. जलोढ़ मिट्टी – ये मिट्टियाँ नदियों द्वारा अपरदित पदार्थों से निर्मित होती है यह मिट्टी धान, गेहूँ, तिलहन, गन्ना, आदि फसलों के लिए उत्तम है क्योंकि इसमे पोटाश तथा कैल्शियम की बहुतता एवं नाइट्रोजन की कमी पी जाती है देश के 43.4% क्षेत्र मे इस मिट्टी का विस्तार हैं।
  2. काली मिट्टी – यह मिट्टी अधिक उर्वरक होती है इसमे लौह तत्व, कैल्सियम, पोटाश, तथा मैग्नीशियम कार्बोनेट की अधिकता होती है यह मिट्टी कपास, तूर, मोटे अनाज, अलसी आदि की खेती के लिए उपयुक्त है इसे रेगुर या काली कपास की मिट्टी एवं उष्ण कटिबंदजीय चरनोजम भी कहा जाता है।
  3. लाल मिट्टी – लाल मिट्टी का विस्तार देश के लगभग 18.6% क्षेत्र पर है  ये ग्रेनाइट एवं निस चट्टानों के विखंडन एवँ वियोजन से बनी है। लोहे के ऑक्साइड की उपस्थिति होने से यह लाल रंग की दिखाई देती है।
  4. लेटराइट मिट्टी –  भारत मे यह मिट्टी पूर्वी एवं पश्चिमी घाट आदि मे पी जाती है इसका स्वरूप ईंट की तरह होता है जो भीगने पर कोमल एवं सूखने पर सख्त हो जाती है इसकी उर्वरक क्षमता कम होती है
  5. पर्वतीय मिट्टी – यह मिट्टी हिमालय एवं प्रयद्वीपीय श्रेणियों पर् पी जाती है यह मिट्टी चाय, कहवा, मसालो एवं फलों के उत्पादन के लिए उपयोगी है।
  6. मरुस्थलीय मिट्टी – राजस्थान, कच्छ, हरियाणा, दक्षिणी पंजाब मे पी जाती है। इसमे बाजरा, ज्वार, तथा मोटे अनाज हि उगाए जा सकते है
  7. पीट तथा दलदली मिट्टी – यह मिट्टी काली, भारी एवं अत्यधिक अम्लीय होती है तथा धान की खेती के उपयुक्त होती हैं। लवणीय तथा क्षारीय मिट्टी – ये मिट्टी पंजाब, हरियाणा, बिहार, उत्तरप्रदेश तथा महाराष्ट्र के शुष्क भागों मे पाई जाती है क्षारीय मृदा मे नाइट्रोजन का अभाव होता है

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