Indian Economy Questions and Answers

वर्तमान दृष्टिकोण के आधार पर आजकल लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में (Economy Questions) अर्थव्यवस्था के प्रश्नों को की भरमार रहती है क्योंकि परीक्षक कि दृष्टि से जो अभ्यर्थी किसी सरकारी जॉब की तैयारी कर रहा है या सार्वजनिक क्षेत्र में अपना योगदान देन चाहता है तो उसे इस क्षेत्र का ज्ञान होना अनिवार्य है। इसलिए अर्थव्यवस्था के बारे में आपका बेसिक ज्ञान आवश्यक है।

यहाँ आपको Economics और Economy के बारे में सम्पूर्ण क्रमवार जानकारी तथा क्रमवार तरीके से उससे संबंधित सभी प्रश्नों एवं उनके उत्तरों का सही ढंग से अवलोकन किया गया है जो आपको भावी परीक्षाओं में आने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में सफलता प्राप्त होगी। आइए जानते है इस विषय के मुख्य बिंदुओं के बारे में जिनकी आपको मुख्य रूप से जानकारी होना अनिवार्य है।

अर्थशास्त्र की परिभाषा Definition of Economics – अर्थशास्त्र Economics शब्द हिन्दी रूपांतर है, इकोनॉमिक्स शब्द “ओकोनॉमिया” से लिया गया है जिसका अर्थ गृह का प्रबंधन, संसाधनों का प्रबंधन या पूँजी का प्रबंधन

अल्फ्रेड मार्शल के अनुसार – अर्थशास्त्र मनुष्य के व्यवहार का अध्ययन है।

रॉबिन्स के अनुसार – अर्थशास्त्र एक विज्ञान है, जो मानव के व्यवहार के संदर्भ में उपलब्ध वैकल्पिक साधनों एवं उनके उद्देश्यों के मध्य सह-संबंधों का अध्ययन करता है

अर्थशास्त्र से संबंधित प्रमुख पुस्तकें एवं लेखक जो आपके Competitive exams में अकसर पूछी जाती रही है-

एडम स्मिथ (Adam Smith) – An enquiry into the Nature and cause of the wealth of Nations

अल्फ्रेड मार्शल (Alfred Marshall)- Principle of Economics

रॉबिन्स (Robbins)- Nature & Significance of science

जॉन मेनार्ड कीन्स (J.M. Keynes) – The General theory of Employment, Interest and Money

एडम स्मिथ को अर्थशास्त्र का जनक कहा जाता है, आधुनिक अर्थशास्त्र का जन्म एडम स्मिथ की पुस्तक “द वेल्थ ऑफ नेशन्स” 1176 के समय से माना जाता है। इसके बाद से अर्थशास्त्र एक विषय के रूप में जाना जाने लगा। एडम स्मिथ स्कॉटलैंड के निवासी थे। 

Indian Economy Questions and Answers in Hindi

1. भारत का वित्तीय वर्ष होता है-

  • 1 अप्रैल से 31 मार्च
  • 1 जनवरी से 31 दिसंबर
  • 1 मार्च से 28 मार्च
  • इनमें से कोई नहीं

2. भारत में राष्ट्रीय आय की गणना किसके द्वारा की जाती है।

  • नीति आयोग द्वारा
  • वित्त आयोग द्वारा
  • केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO)
  • राजस्व बैंक द्वारा

3. निम्न में से कौन एक सेवा क्षेत्र का भाग है –

  • Textile Mills
  • Banking
  • Coal Mine
  • Agriculture

4. राष्ट्रीय आय का अर्थ है-

  • किसी वित्तीय वर्ष में उत्पाद एवं सेवाएं
  • किसी देश में उत्पादित वस्तु एवं सेवाएं
  • किसी देश में उत्पादित अंतिम वस्तु एवं सेवाएं
  • एक वित्तीय वर्ष में किसी देश के नागरिकों द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का मौहिक मूल्य

5. भारत में राष्ट्रीय आय को मापने के लिए प्रयोग किया जाने वाला आधार वर्ष है-

  • 2000 – 2001
  • 2001 – 2002
  • 2005 – 2006
  • 2011 – 2012

6. शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDP) प्राप्त किया जाता है-

  • सकल घरेलू उत्पाद में मूल्य ह्रास जोड़ कर
  • सकल घरेलू उत्पाद में मूल्य ह्रास घटाकर
  • सकल राष्ट्रीय उत्पाद में मूल्य ह्रास जोड़ कर
  • सकल राष्ट्रीय उत्पाद में मूल्य ह्रास घटाकर

7. निम्न में से कौन-सी राष्ट्रीय आय आकलन की विधि नहीं है-

  • व्यय विधि
  • आय विदजी
  • उत्पाद विधि
  • मैट्रिक्स विधि

8. किसी देश के लोगों का जीवन स्तर किससे माना जाता है-

  • प्रति व्यक्ति आय से
  • गरीबी के अनुपात से
  • राष्ट्रीय आय से
  • बेरोजगारी की दर से

9. प्रति व्यक्ति आय प्राप्त होती है-

  • राष्ट्रीय आय / बेरोजगारो की संख्या
  • जनसंख्या / बेरोजगारो की संख्या
  • राष्ट्रीय आय / कुल जनसंख्या
  • ये सभी

10. मूल्य ह्रास किसके बराबर होता है-

  • सकल राष्ट्रीय उत्पाद- शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद
  • सकल राष्ट्रीय उत्पाद – प्रति व्यक्ति आय
  • शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद – सकल राष्ट्रीय उत्पाद
  • शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद – प्रति व्यक्ति आय

11. भारत की राष्ट्रीय आय का सबसे बड़ा भाग निम्न में से किस क्षेत्र से प्राप्त होता है।

  • द्वितीय क्षेत्र
  • प्राथमिक क्षेत्र
  • तृतीयक क्षेत्र
  • इनमें से कोई नहीं

12. किस प्रकार की अर्थव्यवस्था में राष्ट्रीय आय और घरेलू आय समान होती है।

  • बंद अर्थव्यवस्था
  • खुली अर्थव्यवस्था
  • विकारी अर्थव्यवस्था
  • इनमें से कोई नहीं

13. GNP और NNP के बीच अंतर किस में बराबर होता है।

  • व्यक्तिगत कर
  • मूल्यह्रास
  • प्रत्यक्ष कर
  • अप्रत्यक्ष कर

14. किसी देश में उत्पाद किये गये सम्पूर्ण वस्तुओं से सेवाओं का मूल्य कहलाता है-

  • सकल घरेलू उत्पाद
  • कुल आय
  • राष्ट्रीय आय
  • प्रति व्यक्ति आय

15. विदेशों में काम कर रहे भारतीयों की आय है-

  • भारत की घरेलू आय का भाग
  • विदेशों से अर्जित आय का भाग
  • भारत के सकल घरेलू उत्पाद का भाग
  • इनमें से कोई नहीं

16. शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) है-

  • GDP – Depreciation
  • GDP + Foreign Income
  • GNP – Depreciation
  • NOTA

Answers Key

11 अप्रैल से 31 मार्च9राष्ट्रीय आय/ कुल जनसंख्या
2केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO)  10सकल राष्ट्रीय उत्पाद – शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद
3Banking11तृतीयक क्षेत्र
4एक वित्तीय वर्ष में किसी देश के नागरिकों द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का मौहिक मूल्य  12बंद अर्थव्यवस्था
52011-201213मूल्यह्रास
6सकल घरेलू उत्पाद में मूल्य ह्रास घटाकर  14सकल घरेलू उत्पाद   
7मेट्रिक्स विधि15विदेशों से अर्जित आय का भाग
8प्रति व्यक्ति आय से  16GNP-Depreciation  
Indian Economy Questions

इन्हें भी देखे –

ज्यादा जानकारी के लिए पूर्ण लेख को देखे

अर्थशास्त्र के प्रकार Types of Economics

अर्थशास्त्र को विस्तृत रुप से दो में वर्गीकृत किया गया है-

व्यष्टि अर्थशास्त्र – इसके अंतर्गत व्यक्ति, व्यक्तियों/उपभोक्ता की छोटे समूह की छोटी आर्थिक क्रियाओं  का अध्ययन किया जाता है जैसे एक व्यक्ति, एक परिवार, एक उद्योग, एक फार्म आदि

समष्टि अर्थशास्त्र – समष्टि अर्थशास्त्र सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के स्तर पर आर्थिक समस्याओं अथवा आर्थिक मुद्दों का अध्ययन किया जाता है। इसमें सामाजिक कल्याण अधिकतम करने पर बल दिया जाता है न की व्यक्तिगत लाभ को अधिकतम करने पर।

रेगनर फ्रिश (Ragnar Frisch) ने 1933 में सर्वप्रथम व्यष्टि अर्थशास्त्र तथा समष्टि अर्थशास्त्र शब्द का प्रयोग किया था।

अर्थव्यवस्था एवं इसके प्रकार (Classifications of Economy)

अर्थव्यवस्था – अर्थव्यवस्था से अभिप्राय किसी एक क्षेत्र में प्रचलित समस्त आर्थिक क्रियाओं की प्रकृति एवं उनके स्तर से है। जब हम किसी देश की उसकी समस्त आर्थिक क्रियाओं को परिभाषित करते है उसे उस देश की अर्थव्यवस्था कहते है। अर्थव्यवस्था को तीन प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है-

  1. नियंत्रण के आधार पर अर्थव्यवस्था किसी अर्थव्यवस्था में प्रत्येक वस्तु, सेवाओं का उत्पादन, वितरण, तथा उसका मूल्य निर्धारण पर नियंत्रण जैसे-
    • पूंजीवादी अर्थव्यवस्था /उदारवादी अर्थव्यवस्था/बाजार अर्थव्यवस्था – पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में उत्पादन, वितरण, तथा मूल्य निर्धारण पर मुख्यतः निजी क्षेत्र का नियंत्रण होता है। उत्पादन केवल आधी लाभ कमाने के लिए किया जाता है तथा आर्थिक क्रियाओं में सरकार का हस्तक्षेप नहीं होता है। इसमें मूल्य निर्धारण आपसी प्रतिस्पर्धा द्वारा होता है। अधिकांश विकसित देशों में पूंजीवादी अर्थव्यवस्था को अपनाया गया है। जैसे जापान, अमेरिका, फ्रांस, सिंगापूर,ब्रिटेन . पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का उदगम् एडम स्मिथ के विचारों से हुआ।
    • समाजवादी अर्थव्यवस्था/राज्य अर्थव्यवस्था/ साम्यवादी अर्थव्यवस्था – समाजवादी अर्थव्यवस्था में समस्त आर्थिक गतिविधियों जैसे उत्पादन, वितरण तथा मूल्य निर्धारण का नियंत्रण सार्वजनिक क्षेत्र (सरकार) द्वारा किया जाता है। इसका मुख्य उदेश्य लोगों का कल्याण करना होता है। समाजवादी अर्थव्यवस्था का उदगम् पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के विरोध में कार्ल मार्क्स के विचारों से हुआ है। रूस, क्यूबा, उत्तर कोरिया आदि में समाजवादी अर्थव्यवस्था है।
    • मिश्रित अर्थव्यवस्था – मिश्रित अर्थव्यवस्था में पूँजीवादी एवं समाजवादी दोनों अर्थव्यवस्थाओं की विशेषता पाई जाती है। इस प्रजार कर अर्थव्यवस्था में एक ओर आर्थिक क्रियाओं की स्वतंत्रता होती है तथा दूसरों ओर कल्याण की दृष्टि से आर्थिक क्रियाओं में सरकार द्वारा हस्तक्षेप भी किया जाता है। मिश्रित अर्थव्यवस्था की अवधारणा वर्ष 1229 की महा मंदी के कारण उत्पन्न आर्थिक व्यवस्था के समाधान के रूप में ब्रिटिश अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड के विचारों से प्रेरित है। जैसे – भारत
  2. विकास के आधार पर अर्थव्यवस्था – विकास के आधार पर अर्थव्यवस्था को दो प्रकार से वर्गीकृत किया गया है
    • विकसित अर्थव्यवस्था – विकसित अर्थव्यवस्था के मुख्य बिन्दु अच्छा बुनियादी ढांचा, अत्यधिक उन्नत तकनीक, विकास की तेज गति, अधिक प्रति व्यक्ति आय, जीवन के उच्च मानक, कम गरीबी एवं कम बेरोजगारी
    • विकासशील अर्थव्यवस्था – निम्न बुनियादी ढांचा, विकास की धीमी गति, निम्न तकनीक स्तर, जीवन के निम्न मानक, अधिक गरीबी, बेरोजगारी अधिक
  3. विदेशी संबंधों के आधार पर अर्थव्यवस्था
    • खुली अर्थव्यवस्था – वह अर्थव्यवस्था जिसका विश्व की अन्य अर्थव्यवस्थाओं के साथ आर्थिक सम्बन्ध होता है जैसे – अमेरिका भारत पाकिस्तान विश्व के सभी देशों ने खुली अर्थव्यवस्था को अपनाया है दूसरे के साथ आयात-निर्यात होता है विदेशी निवेश होता है राष्ट्रीय आय और घरेलू आय में अंतर होता है।
    • बंद अर्थव्यवस्था – जहाँ अन्य अर्थव्यवस्थाओं से किसी प्रकार से आर्थिक सम्बन्ध नहीं होता है जैसे -उत्तर कोरिया आयात शून्य होता है विदेशी निवेश शून्य होता है राष्ट्रीय आय और घरेलू आय बराबर होती है।

Sectors of Economy अर्थव्यवस्था के क्षेत्र

सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को तीन बड़े क्षेत्रों में बाँटा गया है –

प्राथमिक क्षेत्र – वह क्षेत्र जहाँ कृषि, वन, मछली पालन आदि का उत्पादन कार्य प्राथमिक स्तर पर होता है। प्राथमिक क्षेत्र से द्वितीयक क्षेत्र के लिए कच्चा माल प्राप्त होता है। इस क्षेत्र का GPD में योगदान सबसे कम (17%) है कार्य बल सर्वाधिक (51%) है। प्राथमिक क्षेत्र के अंर्तगत कृषि, पशुपालन, मछली पालन, खनन आदि क्षेत्र आते है।

द्वितीयक क्षेत्र – इसे विनिर्माण क्षेत्र भी कहा जाता है। इसके अंतर्गत मुख्यतः उद्योग, विनिर्माण, लोह-इस्पात, सीमेंट, बिजली, आदि उद्योग आते है। जिनका GDP में योगदान 29% है तथा कार्य बल 22% है।

तृतीयक क्षेत्र या सेवा क्षेत्र – तृतीयक क्षेत्र अर्थव्यवस्था के प्राथमिक क्षेत्र और द्वितीयक क्षेत्र को अपनी सेवा प्रदान करता है। इसमें विभिन्न प्रकार की सेवा प्रदान की जाती है इसलिए इसे सेवा क्षेत्र भी कहा जाता है। इसके अंतर्गत परिवहन, संचार, बैंकिंग, बीमा, व्यापार, शिक्षा क्षेत्र आते है इस क्षेत्र का GDP में सर्वाधिक योगदान (54%) तथा कार्य बल 27% है। 

राष्ट्रीय आय क्या है (National Income)

राष्ट्रीय आय किसी देश में एक वित्तीय वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के मौद्रिक मूल्य का जोड़ होती है जिसमें शुद्ध विदेशी आय भी शामिल होती है।

वित्तीय वर्ष – किसी देश की वित्तीय व्यवस्था के लिए निर्धारित किया गया 12 माह का समय वित्तीय वर्ष कहलाता है। यह अल्ह-अलग देशों में अलग-अलग होता है भारत में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है। भारत में राष्टीय आय का अनुमान केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन (CSO) Central Statistical Origination द्वारा किया जाता है CSO (मुख्यालय- नई दिल्ली) की स्थापना 2 मई 1951 में हुई थी। यह सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियांवन मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।

राष्ट्रीय आय का आकलन देश की आर्थिक गति के माप के लिए, दो या दो से अधिक देशों के बीच तुलना करने के लिए, तथा देश की आर्थिक योजनाओं को तैयार करने के लिए किया जाता है।

राष्ट्रीय आय की माप के लिए अनेक अवधारणाओं का प्रयोग किया जाता है- GDP ( सकल घरेलू उत्पाद), NDP (शुद्ध घरेलू उत्पाद), GNP (सकल राष्टीय उत्पाद) तथा  NNP (शुद्ध राष्टीय उत्पाद)

राष्टीय आय को निकालने की विधियां – उत्पादन विधि, आय विधि, व्यय विधि

मुद्रास्फीति – एक अर्थव्यवस्था में वस्तुओं एवं सेवाओं के कीमत स्तर में होने वाली निरंतर वृद्धि को मुद्रास्फीति कहते है। मुद्रास्फीति का शाब्दिक अर्थ है मुद्रा में कमी होना। मुद्रास्फीति के समय बचत पर नकारात्मक प्रभाव होता है क्योंकि वस्तुएं एवं सेवाएं महंगी हो जाने के कारण आय का अधिक हिस्सा खर्च हो जाता है और बचत नहीं होती है। मुद्रास्फीति के समय सरकार करों में वृद्धि करती है।

मुद्रा अपस्फीति या मुद्रा संकुचन – किसी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं एवं सेवाओं में होने वाली निरंतर कमी को मुद्रा अपस्फीति कहते है।

मुद्रा संस्फीति – जब मुद्रा अपस्फीति की मात्र अधिक हो जाए जिसमें वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतें बहुत नीचे गिर जाती है तब सरकार कीमतों को सामान्य स्तर पर लाने के लिए मुद्रा की आपूर्ति में वृद्धि करती है जिसे मुद्रा संस्फीति की अवस्था कहते है।

विस्फीति – मुद्रा की आपूर्ति को कम करके मुद्रास्फीति को नियंत्रण करने की प्रक्रिया को विस्फीति कहते है।     

(Unemployment) बेरोजगारी क्या है

बेरोजगारी वह स्थिति है जब एक व्यक्ति सक्रिया से रोजगार की खोज करता है परंतु वह रोजगार पाने में असक्षम रहता है। यदि इच्छा (Desire), क्षमता (Capacity) एवं योग्यता (Qualification) रहने के बाद भी जब किसी व्यक्ति को रोजगार नहीं मिल पाता है तो उसे बेरोजगार कहा जाएगा-

NSSO – National Sample Survey Organisation (राष्ट्रीय नमूना सवेक्षण संगठन) भारत में बेरोजगारी से संबंधित आकंडे उपबद्ध करता है

Types of Unemployment बेरोजगारी के प्रकार:-

ऐच्छिक बेरोजगारी (Voluntary Unemployment) :- जब व्यक्ति  प्रचलित मजदूरी दर पर कार्य करने के लिए तैयार नहीं होता है। यह बेरोजगारी मुख्यतः विकसित देशों में पी जाती है।

खुली या अनेच्छिक बेरोजगारी (Open or involuntary Unemployment) :- जब कोई व्यक्ति प्रचलित मजदूरी पर काम करने को तैयार है लेकिन फिर भी उसे काम नहीं मिलता है उसे अनैच्छिक या खुली बेरोजगारी कहा जाता है।

अदृश्य/प्रच्छन्न बेरोजगारी (Disguised unemployment):- जब किसी काम में जरूरत से अधिक व्यक्ति शामिल होते है यदि इन्हें कार्य से हटा भी लिया जाए तो उत्पादन में कोई अंतर नहीं आएगा, भारत में कृषि क्षेत्र में प्रच्छन्न बेरोजगारी अधिक देखने को मिलती है, भारत के ग्रामीण क्षेत्र के लगभग 60% श्रमिक प्राथमिक क्षेत्र में लगे हुए है।

मौसमी बेरोजगारी (Seasonal unemployment) :– विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में मौसम परिवर्तन के कारण कृषि क्षेत्र में मौसमी बेरोजगारी उत्पन्न हो जाती है भारत के प्राथमिक क्षेत्र में मौसमी बेरोजगारी अधिक देखने को मिलती है।

संरचनात्मक बेरोजगारी (Structural Unemployment) :– अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तन के कारण उत्पन्न बेरोजगारी को संरचनात्मक बेरोजगारी कहते है

चक्रीय बेरोजगारी (Cyclical Unemployment):- अर्थव्यवस्था में होने वाले उतार-चढाव के द्वारा उत्पन्न बेरोजगारी को चक्रीय बेरोजगारी कहते है। जब अर्थव्यवस्था समृद्ध होती है तो उत्पादन भी बढ़ता है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते है। लेकिन जब सुस्ती का दौर आता है तो उत्पादन कम होता है और रोजगार के अवसर कम पैदा होते है तथा अद्योगिक इकाईया कर्मचारियों की छटनी करती है।

घर्षणात्मक बेरोजगारी (Frictional Unemployment) :- ऐसा व्यक्ति जो एक रोजगार को छोड़कर किसी दूसरे रोजगार में जाता है तो दोनों रोजगारों की अवधि में वह बेरोजगार हो जाता है। यह बेरोजगारी अल्पकालिक होती है

मौद्रिक नीति क्या है

मौद्रिक नीति एक एसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा अर्थव्यवस्था में पूंजी की आपूर्ति को नियंत्रण किया जाता है। RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC), मौद्रिक नीति बनती है। इसमें 8 सदस्य होते है जिसमें 3 सदस्य RBI द्वारा तथा 3 सदस्य भारत सरकार द्वारा नामित किए जाते है। RBI प्रत्येक 2 माह के बाद मौद्रिक नीति की समीक्षा करता है। इसका मुख्य उद्देश्य मुद्रास्फीति नियंत्रण तथा समवृद्धि एवं विकास है।

मौद्रिक नीति के उपकरण (Instrument of Monitory Policy)

रेपो रेट RR (Repo Rate)- वह दर जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक, अन्य बैंकों को अल्पकालीन (15 दिन तक, प्रतिभूतियों के बदले) ऋण देता है, वर्तमान में यह दर 4% है।

रिजर्व रेपो रेट (Reverse Rope Rate)- वह दर जिसमें बेंक अपने पैसे, RBI के पास जमा करते है। वर्तमान में यह दर 3.35% है

नगद आरक्षित अनुपात CRR(Cash Reserve Ratio)- नगद आरक्षित अनुपात, वह राशि है, जिसे बैंकों द्वारा अपनी कुल जमाओ का एक निश्चित भाग(Security Money) RBI के पास रखना आवश्यक है, ताकि विपरीत परिस्थितियों में बैंक को दिवालिया होने से बचाया जा सके। वर्तमान में CRR 3% है।

वैधानिक तरलता अनुपात SLR (Statutory Liquidity Ratio)- SLR वह राशि है, जिसे ग्राहकों को ऋण प्रदान करने से पहले व्यापारिक बैंकों को अपने कुल जमा का निश्चित अनुपात नगदी, स्वर्ण, सरकारी प्रतिभूतियों के रूप में जमा रखना अनिवार्य है। वर्तमान में SLR 18% है।

सीमांत स्थायी सुविधा MSF (Marginal Standing Facility)- MSF वह दर है, जिस पर बैंक RBI से एक रात के लिए ऋण उधार लेते है। वर्तमान MSF दर 4.24% है।

बैंक दर (Bank Rate)- जिस सामान्य ब्याज दर पर RBI द्वारा बैंकों को पैसा उधार दिया जाता है। वर्तमान दर 4.25% है

भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India)

RBI देश का केन्द्रक बैंक है इसकी स्थापना हिल्टन यंग कमीशन की सलाह पर की गई थी। (Reserve Bank of India Act-1934 के अंतर्गत 1 अप्रेल 1935 में 5 करोड़ रुपये की अधिकृत पूंजी के साथ हुई थी। 1 January 1949 में RBI का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।

RBI (Reserve Bank of India) के कार्य

  • नोटों का निर्गमन
  • एक रुपये के नोट को छोड़ कर सभी मूल्यों के नोट RBI द्वारा जारी किए जाते है
  • परिचालन के योग्य न रहने पर करेंगी एवं सिक्कों को नष्ट करना
  • बैंकों के बैंक के रूप में,
  • विदेशी विनिमय का नियंत्रण,
  • मौद्रिक नीति बनाना, आदि।
Indian economy questions
Indian Economy questions in Hindi

Leave a Comment